सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सबको खुश रखना है अगर...



इंसान की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है किसी को खुश रखना अगर आप चाहते हैं कि सभी आपको याद रखें तो आप जहां भी जाएं दूसरों को खुश रखने की कोशिश करें लेकिन खुश रहने के लिए सबसे पहले आप जो भी काम कर रहे हैं उसमें आपकी सौ प्रतिशत खुशी जरूरी है, तभी आप दूसरों को खुशी दे पाएंगे।एक महानगर में आंधी आई, उसमें बड़े-बड़े पेड़ धराशायी हो गए। बहुत सारे लोगों की मृत्यु हो गई। आंधी में कई लोग बेघर हो गए, कई बच्चे अनाथ हो गए। कई मांओं की गोद सुनी हो गई। दूसरी जगहों से उस महानगर का संबंध टूट गया। जिससे पूरे शहर में अव्यवस्था फैल गई। यह देखकर आंधी ने अपनी छोटी बहन बसंती बयार से प्रश्र किया क्या तुम मेरे समान शक्ति नहीं चाहती?

जब मैं उठती हूं तो बड़े-बड़े भवनों को भी में खिलौनों की तरह मसल देती हूं। मेरी शक्ति देखकर अच्छे पहलवान भी अपने घरों में दुबक जाते हैं। पशु-पक्षी भी जान बचाकर भागते हैं।यह सुनकर बसंती बयार कुछ नहीं बोली और अपनी यात्रा पर निकल गई। उसे जाते देख आंधी भी उसके पीछे गई। आंधी ने देखा उसके आते देख नदियां, खेत, जंगल सभी मुस्कुराने लगे,बागों में फूल खिल उठे।

आंधी ने जब बसंती बयार के आने पर जो खुशी देखी तो उसे महसूस हुआ कि उसके आने पर लोगों के चेहरे पर जितना गम दिखाई देता है। उससे कई गुना ज्यादा खुशी दिखाई देती है। यह देख कर आंधी बहुत दुखी हो गई। उसे महसूस हुआ कि खुशी देने वाले की ताकत गम देने से कई गुना ज्यादा है क्योंकि खुशी को हर कोई याद रखना चाहता है और गम को हर कोई भुलाना। इसलिए जीवन में कोशिश यही करें कि आप जहां भी जाऐं वहां ऐसा माहौल बनाऐं कि लोग जब भी आपको याद करें तो खुश होकर।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अपने ईगो को रखें पीछे तो जिदंगी होगी आसान

आधुनिक युग में मैं(अहम) का चलन कुछ ज्यादा ही चरम पर है विशेषकर युवा पीढ़ी इस मैं पर ज्यादा ही विश्वास करने लगी है आज का युवा सोचता है कि जो कुछ है केवल वही है उससे अच्छा कोई नहीं आज आदमी का ईगो इतना सर चढ़कर बोलने लगा है कि कोई भी किसी को अपने से बेहतर देखना पसंद नहीं करता चाहे वह दोस्त हो, रिश्तेदार हो या कोई बिजनेस पार्टनर या फिर कोई भी अपना ही क्यों न हों। आज तेजी से टूटते हुऐ पारिवारिक रिश्तों का एक कारण अहम भवना भी है। एक बढ़ई बड़ी ही सुन्दर वस्तुएं बनाया करता था वे वस्तुएं इतनी सुन्दर लगती थी कि मानो स्वयं भगवान ने उन्हैं बनाया हो। एक दिन एक राजा ने बढ़ई को अपने पास बुलाकर पूछा कि तुम्हारी कला में तो जैसे कोई माया छुपी हुई है तुम इतनी सुन्दर चीजें कैसे बना लेते हो। तब बढ़ई बोला महाराज माया वाया कुछ नहीं बस एक छोटी सी बात है मैं जो भी बनाता हूं उसे बनाते समय अपने मैं यानि अहम को मिटा देता हूं अपने मन को शान्त रखता हूं उस चीज से होने वाले फयदे नुकसान और कमाई सब भूल जाता हूं इस काम से मिलने वाली प्रसिद्धि के बारे में भी नहीं सोचता मैं अपने आप को पूरी तरह से अपनी कला को समर्पित कर द...

प्रभु का सिमरण सबसे ऊंचा

एक चोर था ! बडा शातिर ! सभी जानते थे कि वह चोर है ! उस गांव के तथा आस-पास के गांवों में जितनी भी चोरियां होती थीं सबके लिए वही जिम्मेदार था ! परंतु वह इतनी सफाई से चोरी करता था कि कभी पकडा नही गया ! चोरी करने की सभी बारीकियों से वाकिफ ! वो अपनी पत्नी और इकलौते बेटे के साथ गांव के नज़दीक ही पहाडी पर एक झोंपडी में रहता था ! चोरी का सामान भी वहीं पहाडी में एक गुफा में छिपा कर रखता था जिससे तलाशी की नौबत आने पर भी पकडा न जा सके ! चोरी करते-करते उम्र के आखरी पडाव में आ पहुंचा ! अक्सर बीमार भी रहने लगा था ! उसे आभास होने लगा कि अब उसके जीवन के दिन थोडे ही हैं ! एक दिन उसने अपने बेटे को बुलाकर उसे चोरी के सारे गुर सिखा दिये और जहां पर उसने चोरी का सामान छुपाया था वह जगह भी दिखा दी ! भगवान की ऐसी कुदरत हुई कि कुछ दिनों बाद ही वो चल बसा ! अब मां-बेटे अकेले रह गए ! धीरे-धीरे पिता द्वारा छोडा चोरी का सामान समाप्त होने लगा ! तब बेटे ने अपनी मां से कहा – “मां, मैं कुछ काम करना चाहता हूं ! बताओ कौन सा काम करूं !” “यह भी कोई पूछ्ने की बात है ?” मां ने समझाया -“बेटा तुम्हारे पिता चोरी किया करते थे ...

रामायण क्या-क्या सिखाती है?

रामायण पौराणिक ग्रंथों में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताब है। रामायण को केवल एक कथा के रूप में देखना गलत है, यह केवल किसी अवतार या कालखंड की कथा नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का रास्ता बताने वाली सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक है। रामायण में सारे रिश्तों पर लिखा गया है, हर रिश्ते की आदर्श स्थितियां, किस परिस्थिति में कैसा व्यवहार करें, विपरित परिस्थिति में कैसे व्यवहार करेंं, ऐसी सारी बातें हैं। जो आज हम अपने जीवन में अपनाकर उसे बेहतर बना सकते हैं। - दशरथ ने अपनी दाढ़ी में सफेद बाल देखकर तत्काल राम को युवराज घोषितकर उन्हें राजा बनाने की घोषणा भी कर दी। हम जीवन में अपनी परिस्थिति, क्षमता और भविष्य को देखकर निर्णय लें। कई लोग अपने पद से इतने मोह में रहते हैं कि क्षमता न होने पर भी उसे छोडऩा नहीं चाहते। - राजा बनने जा रहे राम ने वनवास भी सहर्ष स्वीकार किया। जीवन में जो भी मिले उसे नियति का निर्णय मानकर स्वीकार कर लें। विपरित परिस्थितियों के परे उनमें अपने विकास की संभावनाएं भी तलाशें। परिस्थितियों से घबराएं नहीं। - सीता और लक्ष्मण राम के साथ वनवास में भी रहे, जबकि उनका जाना जरूरी नहीं था। ये हमें...